राजस्थान में मंत्री सत्ता मद में चूर! अपनी सरकार की क्यों करवा रहे हैं किरकिरी

राजस्थान में मंत्री सत्ता मद में चूर! अपनी सरकार की क्यों करवा रहे हैं किरकिरी
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✍️ मनीष बागड़ी
जयपुर : राजस्थान में भजनलाल सरकार के मंत्री क्या सत्ता के मद में चूर हो चुके हैं? यह चर्चा न केवल सियासत में घूम रही है, बल्कि आमजन में भी इसकी काफी चर्चा हो रही है। सरकार के मंत्रियों के लगातार बिगड़े और विवादित बयान इस बात की ओर साफ संकेत कर रहे हैं। राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की बात करे या, नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह सिंह खर्रा, सहकारिता मंत्री गौतम दक, वन मंत्री संजय शर्मा की करें। ऐसे तमाम मंत्रियों के नाम इस लिस्ट में है, जहां उनके विवादित बयान और बिगड़े बोल अपनी ही सरकार के किरकिरी करते हुए नजर आ रहे हैं। मंत्रियों के इन बयानों से साफ जाहिर हो रहा है कि कहीं ना कहीं उन पर सत्ता का मद पूरी तरह हावी हो चुका है। इस रिपोर्ट में जानिए मंत्रियों के विवादित बयान…

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चिकित्सा मंत्री ने खुद करवा दी सरकार की फजीहत

बीते दिनों कोटा में इलाज के दौरान गर्भवती महिलाओं की मौत के बाद फिर से बीकानेर मामले ने सियासी टेंपरेचर चढ़ा दिया है। गर्भवती महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने, जो विवादित बयान दिया। वह न केवल हास्यापद है, बल्कि अपनी ही सरकार की फजीहत कर रहा है। बीकानेर में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान चिकित्सा मंत्री ने प्रसूता महिलाओं के लिए विवादित बयान दिया। उन्होंने पत्रकारों के सवाल के जवाब में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से कहा ‘आप पत्रकारों को बताओ कि गर्भवती महिलाएं सीरियस आई थी या फिर नाचते गाते आई थी।’ इस पर पत्रकार चिकित्सा मंत्री पर जमकर भड़क गए। उन्होंने कहा कि कोई प्रसूता नाचती गाती हुई कैसे हॉस्पिटल आ सकती है? चिकित्सा मंत्री के इस बयान के बाद न केवल सरकार की छवि प्रभावित हुई है, बल्कि गजेंद्र सिंह खींवसर की जमकर आलोचना भी हो रही है।

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झाबर सिंह खर्रा भी दिखा रहे हैं अपना गुस्सैल स्वभाव

भजनलाल सरकार के दूसरे विवादित मंत्री नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा भी कम सुर्खियों में नहीं हैं, जो अपने गुस्सैल स्वभाव को लेकर जाने जाते हैं। बीकानेर में उनका यह गुस्सा देखने को मिला, जो काफी चर्चा में रहा और लोगों ने इसकी आलोचना भी की। जनसुनवाई के दौरान पहुंचे युवकों पर झाबर सिंह इतने नाराज हो गए कि उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि ज्ञापन फाड़ दूंगा, इनको पढ़ूंगा भी नही। मंत्री के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। इसको लेकर लोगों ने मंत्री का अहंकार बताते हुए कहा कि सत्ता का मद उन पर पूरी तरह हावी हो चुका है। इसी जनसुनवाई में मंत्री एक युवक पर भी जमकर नाराज हुए, जब वह जनसुनवाई समाप्त होने के बाद अपनी समस्या लेकर पहुंचा। इस पर मंत्री ने युवक से कहा कि जब सुनवाई खत्म हो गई हो, तब आए हो। जब सब चले जाएंगे, तब जाकर हो हल्ला करोगे। यह बर्दाश्त किया जाएगा। तुम्हें जनसुनवाई के दौरान मिलना चाहिए था। इसी तरह पाली में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवाल से मंत्री बेहद नाराज हो गए और चीखने चिल्लाने लगे।

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मंत्री पर कथित रूप से गालियां देने का लगा आरोप

बीते दिनों सरकार के सहकारिता मंत्री गौतम दक भी काफी सुर्खियों में रहे। उन पर कथित तौर पर बड़ी सादड़ी में पुलिस के साथ गाली गलौज करने का आरोप लगा। इसको लेकर एक ऑडियो भी तेजी से वायरल हुआ। जिसमें 15 बार पुलिस को भद्दी गालियां दी गई। जिसको लेकर विपक्ष और आम जन ने मंत्री की काफी आलोचना की। हालांकि मंत्री गौतम दक ने अपना बचाव करते हुए वीडियो जारी कर सफाई दी कि जो ऑडियो वायरल हुआ है, उनसे उनका कोई लेना नहीं देना नहीं है। मंत्री ने दावा किया कि यह ऑडियो एडिटेड है। इधर, सियासत और सोशल मीडिया पर इस ऑडियो को लेकर काफी चर्चा रही, जहां गंभीर सवाल भी खड़े हुए कि क्या जनप्रतिनिधि और एक के मंत्री स्तर के नेता को इस तरह की भाषा शोभा देती है?

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पुलिसकर्मी के एसी में बैठने पर बिगड़े गए वन मंत्री

बीते दिनों पीएम मोदी के ईंधन बचत के संदेश के बाद राजस्थान में सरकार और नेताओं ने इस पर अनुसरण किया, लेकिन कई मामलों में नेताओं की रील वायरल होने के बाद लोग सवाल उठाने लगे कि, क्या यह ज्यादा ही दिखावा तो नहीं हो गया? इस बीच वन मंत्री संजय शर्मा की काफी आलोचना हुई। अलवर में एक पुलिसकर्मी वाहन में बैठा हुआ था। इस पर वन मंत्री उस पुलिसकर्मी पर भड़क गए कि वह गाड़ी में बैठकर एसी की हवा खा रहा था। सोशल मीडिया पर लोग पुलिसकर्मी के पक्ष में उतर आए। लोगों ने वन मंत्री की इस हरकत को केवल टीआरपी बटौरने का स्टंट बताया। उन्होंने कहा कि मंत्री खुद एसी की गाड़ियों और एसी वाले चैंबर और मीटिंग हॉल में बैठते हैं, तब क्या बिजली की खपत नहीं होती? जो मंत्री को भीषण गर्मी में एक पुलिसकर्मी के कुछ देर के लिए एसी में बैठकर राहत पाना नागवार गुजरा।

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मनीष बागड़ी प्रोफ़ाइल फोटो

पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखना पसंद है, पत्रकारिता में 20 वर्ष से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में ‘स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स’ लिखता हूं, पत्रकारिता के इस सफर में राजस्थान पत्रिका, A1टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल, दैनिक रिपोर्टर्स.com जैसे न्यूज़ प्लेटफार्म पर भी कार्य किया है।

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मनीष बागड़ी, Author

पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखना पसंद है, पत्रकारिता में 20 वर्ष से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में 'स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स' लिखता हूं, पत्रकारिता के इस सफर में राजस्थान पत्रिका, A1टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल, दैनिक रिपोर्टर्स.com जैसे न्यूज़ प्लेटफार्म पर भी कार्य किया है।Follow us - manishbagdi.reporter@gmail.com, www.thepoliticaltimes.live,
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