आमेर राजा मानसिंह का पुर्नजन्म! 4 सौ साल बाद बच्चे कान्हाराम बैरवा का दावा

आमेर राजा मानसिंह का पुर्नजन्म! 4 सौ साल बाद बच्चे कान्हाराम बैरवा का दावा
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टोंक : पुनर्जन्म को लेकर आए दिन कई हैरान कर देने वाली कहानियां सामने आती है, लेकिन इस बार यह कहानी काफी रोचक है। इस कहानी में किरदार और कोई नहीं एक आमेर के राजा के रूप में सामने आया है, जहां राजस्थान के टोंक जिले में एक 10 साल का बच्चा खुद को आमेर का राजा मानसिंह होने का दावा कर रहा है। बच्चे का कहना है कि उसका पुर्नजन्म हुआ है। इसको लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स में बच्चे कान्हाराम बैरवा ने इस बात का दावा करते हुए खुलासा किया है। ऐसे में सवाल उठा रहा है कि क्या यह कोई पिछले जन्म का रहस्य है, या बच्चे का भ्रम? क्या 400 साल पहले का राजा मानसिंह का यह इतिहास एक बार फिर जागृत हो गया है! इसको लेकर सोशल मीडिया पर जमकर बहस छिड़ी हुई है। इसको लेकर सबके अपने-अपने दावें है। आईए जानते है इस रिपोर्ट में क्या है पूरा मामला…

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10 साल का बच्चा बताता है, खुद को राजा मानसिंह

यह कहानी सुनकर एक बार आप भी हैरान हो गए होंगे, लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर यह कहानी काफी सुर्खियों में है। टोंक जिले के जैकमाबाद के रहने वाला 10 साल का बच्चा कान्हाराम बैरवा कुछ ऐसा ही दावा कर रहा है। जिसमें वह खुद को आमेर का राजा मानसिंह बताते हुए अपना पुनर्जन्म बता रहा है। परिजनों के अनुसार कान्हाराम काफी वर्षों से इस तरह की बातें कर रहा है। बच्चे की मां और परिजनोें ने बताया कि वह कहता है कि उसे आमेर जाना है, क्योंकि वह वहां का राजा है। यहां तक कि उसका रहन-सहन भी अलग तरीके से रहता है।

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कान्हाराम का दावा, उसी ने बनवाया आमेर का किला

जब कान्हाराम से एक मीडिया रिपोर्ट्स में पूछा गया कि वह खुद को राजा मानसिंह क्यों कहता है, तो वह इसके पीछे तर्क देकर दावा करता है। वह कहता है कि वह पिछले जन्म में आमेर का राजा का मानसिंह था। कानाराम का दावा है कि पिछले जन्म में उसके दो मुख्य रानियां थी और उसके तीन भाई थे। उसने दावा किया कि आमेर का किला पिछले जन्म में उसी ने बनवाया था। यहां तक की सवाई मानसिंह अस्पताल भी मेरे ही नाम से जाना जाता है। उसने बताया कि हल्दीघाटी में उसने महाराणा प्रताप से युद्ध किया था। उसने बताया कि उसे अनाज की मण्डी में दुश्मनों ने घेर कर भाले से मार दिया था।

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बंगाल से लाया था शीला देवी को

कान्हाराम की मां और परिजन बताते हैं कि वह बार-बार खुद को महाराजा मानसिंह बताता है। वह बार बार आमेर जाने की बात कहता है। यह भी कहता है कि उसे शीला देवी के दर्शन करने हैं। एक मीडिया रिपोर्ट्स में कान्हाराम ने बताया कि शीला देवी का मंदिर आमेर में है, जिसे वह बंगाल से लेकर आया था। कान्हाराम का कहना है कि शीला देवी एक गुप्त कमरे में है, जबकि जो मूर्ति रखी है। वह उनकी प्रतीक है। उसने बताया कि वह पिछले जन्म में युद्ध जीतने के बाद शीला देवी को नरबलि चढ़ाता था, लेकिन बाद में पशु की बलि देने लगा। इससे माता उसे रुष्ट हो गई। इससे नाराज होकर शीला माता की गर्दन तिरछी हो गई, जो आज भी देखी जाती है।

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कान्हाराम का रहन सहन भी है राजपूतों की तरह

कान्हाराम की मां और बहन ने बताया कि वह बचपन से ही वह इस तरह की बातें करता था, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। यहां तक की कानाराम का रहन सहन भी राजपूतों की तरह है। वह बिना घी के भोजन नहीं करता है। इसके अलावा अपने परिवार के साथ भी खाना नहीं खाता है, क्योंकि वह कहता है कि तुम बैरवा हो मैं और मैं राजा मानसिंह हूं। वह करीब 3 साल से खुद को राजा बताते हुए तरह-तरह की बातें करता है, अलग ही बर्तनों में खाना खाता है। कान्हाराम की बहन ने बताया कि वह पुरानी पुरानी बातें बताता था कि वह किस तरह से युद्ध करता था।

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जानिए राजा मानसिंह और शीला देवी का वास्तविक इतिहास

आमेर के राजा मानसिंह राजस्थान में प्रसिद्ध शासको में से एक है, उनका शासन 1589 से 1614 ई तक रहा। उन्होंने 1592 में आमेर किले का निर्माण शुरू करवाया, जो 1599 में पूरा हुआ। राजा मानसिंह मुगल सम्राट अकबर के प्रधान सेनापति थे। 16वीं शताब्दी के अंत में बंगाल में हुए विद्रोह को दबाने के लिए अकबर ने मानसिंह को बंगाल भेजा था, जहां राजा केदार को मानसिंह ने पराजित किया और वहां से शीला देवी की को आमेर लाया गया। आमेर में उस शीला को कारीगरों ने तराश कर महिषासुर मर्दिनी के रूप में एक सुंदर प्रतिमा स्थापित की, जो आज श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। माता को नरबलि का भोग चढ़ाया जाता था, लेकिन जब उन्हें पशुओं की बाली दी गई, तो माता रूष्ट हो गई और उनकी गर्दन तिरछी हो गई, जो आज भी देखी जाती है।

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मनीष बागड़ी, Author

पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखना पसंद है, पत्रकारिता में 20 वर्ष से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में 'स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स' लिखता हूं, पत्रकारिता के इस सफर में राजस्थान पत्रिका, A1टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल, दैनिक रिपोर्टर्स.com जैसे न्यूज़ प्लेटफार्म पर भी कार्य किया है।Follow us - manishbagdi.reporter@gmail.com, www.thepoliticaltimes.live,
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