पहले ट्रेन रोकी, अब हमारी सांसे न रोक दे, टोंक सांसद के बयान से मचेगा बवाल!
जयपुर : राजस्थान में करौली जिले के पांचना बांध को लेकर सियासी टेंपरेचर जमकर गर्माया हुआ है। बांध से पानी छोड़ने को लेकर 20 सालों से विवाद चल रहा है। इस बीच टोंक सांसद हरीश मीणा अपने सियासी बयानों के कारण सुर्खियों में हैं। हाल ही में वायरल हुए उनके एक बयान ने सियासत में जमकर हलचल मचा दी है। इस बयान में उन्होंने गुर्जर समाज का नाम लिए बगैर उन पर जमकर निशाना साधा हैं। हरीश मीणा के बयान से केवल सियासत में हलचल मची है, बल्कि दो समुदायों के बीच फिर से विवाद गहराने की संभावना की चर्चाएं शुरू हो गई है। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया काफी चर्चा का विषय बना हुआ हैं।
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पहले रेल रोकी, अब क्या पता हमारी सांसे रोक दे
पांचना बांध को लेकर लगातार विवाद गहराता जा रहा है। बांध से पानी छोड़ने की मांग को लेकर टोंक सांसद हरीश मीणा का पक्ष कमांड क्षेत्र के लोगों के साथ देखने को मिला हैं। इस बीच जो सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें हरीश मीणा ने बिना नाम लिए गुर्जर समाज पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ‘यह वही लोग हैं, जिन्होंने कुछ साल पहले ट्रेन रोकी, रोड़़ रोका, पानी रोका और अब क्या पता हमारी सांसे रोक देंगे, तो यह कौन सा तरीका है मांगने का। दरअसल, पांचना बांध के डूब क्षेत्र के किसान अपनी जमीनों के मुआवजे और विभिन्न मांगों को लेकर बांध से पानी छोड़ने का विरोध कर रहे हैं। इस संदर्भ में ही टोंक सांसद हरीश मीणा का यह बयान सामने आया हैं।
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पानी छोड़ने के पक्ष में हैं, सांसद हरीश मीणा
बता दें कि करौली जिले के पांचना बांध में 20 सालों से विवाद गराया हुआ है। इसकी मुख्य वजह बांध के डूब क्षेत्र के लोग पानी छोड़ने का विरोध कर रहे हैं। उनकी मांगे है कि उनकी जमीन डूबी हुई हैं। उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है। ऐसे में जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाएगी। तब तक पानी नहीं छोड़नेे दिया जाएगा। इधर, कमांड क्षेत्र जिसमें सवाई माधोपुर और करौली जिले के लोग हैं, जो लगातार पानी छोड़े जाने की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पानी के बिना उनके फैसले बर्बाद हो रही है। जबकि यह बांध सिंचाई के लिए बनाया गया था। इधर, टोंक सांसद हरीश मीणा पानी छोड़ने के पक्ष में है। उन्होंने बीते दिनों लोकसभा में यह मुद्दा भी उठाया और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर हाई कोर्ट के आदेश की पालना करवाने की मांग की।
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2006 में गुर्जर समाज ने किया था आरक्षण आंदोलन
बता दें कि गुर्जर समाज ने आरक्षण की मांग को लेकर वर्ष 2006 में आंदोलन शुरू किया था। इस आंदोलन की अगवाई कर्नल किरोड़ी बैंसला की अगवाई में हुई। इस आंदोलन के चलते गुर्जर समाज ने करौली के हिंडोन में सड़कों और रेल पटरियों को जाम कर दिया था। इसके अलावा 2007 और 2008 में यह आंदोलन उग्र हो गया। इस आंदोलन में पीलूपुरा और सिकंदरा में हिंसक संघर्ष हुआ। जिसमें पुलिस की फायरिंग और हिंसक घटनाओं में गुर्जर समाज के 70 से अधिक लोगों की इस आंदोलन में जान गई थी।

पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखना पसंद है, पत्रकारिता में 20 वर्ष से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में ‘स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स’ लिखता हूं, पत्रकारिता के इस सफर में राजस्थान पत्रिका, A1टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल, दैनिक रिपोर्टर्स.com जैसे न्यूज़ प्लेटफार्म पर भी कार्य किया है।
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