नसरुद्दीन शाह ने खुद को बताया ‘दिमागी नक्सली’, सियासत में उबाल, अभिनेता पुनीत इस्सर ने पूछा क्यों हो दिमागी नक्सल

✍🏻 मनीष बागड़ी
पीएम नरेंद्र मोदी के दिमागी नक्सली बयान एक बार फिर नई बहस छिड़ गई। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता नसरुद्दीन शाह ने पीएम मोदी को निशाना बनाते हुए खुद का दिमागी नक्सल बताकर विवादित बयान दिया है। इसने देश की सियासत का पारा उबाल पर ला दिया है। उन्होंने न केवल खुद को फक्र करते हुए खुद का दिमागी नक्सली बताया है। बल्कि बिना नाम लिए पीएम मोदी को चुनौती भी दे डाली। अब इस बयान को लेकर नसरुद्दीन शाह की जमकर आलोचना हो रही है। अब तो शाह बॉलीवुड के भी निशाने पर आ गए है। इसको लेकर कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। इस रिपोर्ट के जरिए पूरे मामले को समझिए।
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पहले समझिए नसरुद्दीन शाह ने क्या कहा
नसरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर अपना एक विवादित बयान का वीडियो शेयर किया, जो अब देश की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस वीडियो में नसरुद्दीन शाह कहते हैं कि मैं फक्र के साथ कहता हूं, कि मैं दिमागी नक्सल हूं। उन्होंने पीएम मोदी का नाम लिए बगैर उनके बयान की आलोचना करते हुए कहा कि एंटी नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग या दिमागी नक्सली कहकर जो करना है, कर लो….देख लेंगे कितना जोर बाजुए कातिल में है। 2 मिनट 6 सैंकड का यह वीडियो न केवल तेजी से शेयर हो रहा है, बल्कि सोशल मीडिया पर शाह के इस बयान की जमकर आलोचना हो रही हैं।
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अभिनेता शाह का, पीएम मोदी पर निशाना
अपने वीडियो के माध्यम से नसरुद्दीन शाह ने पीएम मोदी का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिमागी नक्सली जैसे क्या-क्या नाम दिए हैं। देश की चौकीदार ने मुझ जैसे लोगों को। उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि टुकड़े-टुकड़े गैंग है, तो इस देश की नाजायज हुकूमत है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि और क्या-क्या करोगे, इस देश के नौजवानों की हिम्मत को तोड़ने, शिक्षा तंत्र को तोड़ने और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए। उन्होंने जामिया यूनिवर्सिटी को लेकर इशारों में केंद्र सरकार को चुनौती दी है कि वहां क्या जुल्म किया जा रहा है, उसे याद रखा जाएगा। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार, मीडिया और बीजेपी की आईटी सेल को लेकर भी उन्होंने आपत्तिजनक टिप्पणी की।
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नसरुद्दीन शाह के विरोध में उतरे अभिनेता पुनीत इस्सर
इधर, नसरुद्दीन शाह के इस नक्सली बयान को लेकर अब बवाल मचता जा रहा है। अब बॉलीवुड भी उनकी इस सोच पर आपत्ति जता रहा हैं। इसको लेकर महाभारत में दुर्याेधन का रोल करने वाले अभिनेता पुनीत इस्सर ने नसरुद्दीन शाह पर कड़ी टिप्पणी की। समाचार एजेंसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि नरसी सब वरिष्ठ कलाकार है, हमारे शिक्षक भी रहे हैं, लेकिन देश और विदेश के कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर वे चुप रहते हैं, लेकिन जब भी भारत या सरकार की छवि खराब करने की बात होती है, तो वह इस काम में सबसे आगे रहते हैं। उन्होंने वह अपने बयान में कहा कि वह वामपंथी और नक्सली झुकाव के नजरिया से हर चीज को देखते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उन्हें सरकार पसंद नहीं है तो चुनाव लड़कर जनता का समर्थन जितना चाहिए। न केवल बयान बाजी करना। उन्होंने आगे सवाल उठाते हुए कहा कि इन टुकड़े-टुकड़े गैंग और जेएनयू के लोगों को देखो, जब हमारे देश में सजा पाए अपराधियों और जेल में बंद आतंकवादियों की बात आती है तो वह उनकी रिहाई की बात करते हैं। उनके पक्ष में बोलते हैं। ऐसे में अगर आप उन लोगों का समर्थन करेंगे, तो भारतीय होने का क्या मतलब है?
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मुझे तो आपकी चरित्र का देरी से पता चला
नसरुद्दीन शाह के बयान को लेकर केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू की भी तल्ख टिप्पणी सामने आई। इसमें उन्होंने कहा कि मुझे नसरुद्दीन शाह के असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला, वे भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि मुझे लगता था कि नसरुद्दीन शाह सिर्फ एक साधरण अभिनेता है, मैं उनका सम्मान करता था और उन्हें लाइक भी करता था, लेकिन मुझे कभी पता नहीं था कि वह एक खतरनाक शहरी दिमागी नक्सली है। नसरुद्दीन शाह के बयान के बाद देश में लगातार उनके खिलाफ आलोचना शुरू हो गई है।
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दिमागी नक्सली को लेकर यह था पीएम मोदी का यह बयान
बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली के लाल किले में दिमागी नक्सली शब्द का इस्तेमाल करते हुए एक बयान दिया था। जिस पर काफी बवाल हुआ। राजनीतिक पार्टियों की कई कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई। कांग्रेस के पूर्व मंत्री पी चिदंबरम ने भी नसरुद्दीन शाह की तरह बयान देकर खुद को दिमागी नक्सली होने पर गर्व बताया था। इस बयान के माध्यम से पीएम ने कहा था कि जंगलों में हम हथियारी नक्सली को खत्म करने में सफल रहे हैं, लेकिन आज भी देश में दिमागी नक्सली हैं, जो इस मौके की तलाश में रहते हैं। जो हिंसा अराजकता का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहे है। समाज को गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। हमें इन दिमागी नक्सली को पहचान करना होगा और उन्हें अलग-अलग करना होगा। देश में युवाओं को विकसित भारत के निर्माण में जोड़ना होगा।
✍🏻 मनीष बागड़ी

मनीष बागड़ी, राजनीतिक पत्रकार और द पॉलिटिकल टाइम्स के संपादक हैं। पत्रकारिता में 25 वर्ष से अधिक अनुभव के साथ वे पॉलिटिकल आर्टिकल्स, प्रशासनिक खबरों और विशेष स्टोरीज पर फोकस करते हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखते हैं और IAS, IPS जैसे अधिकारियों से जुड़ी विशेष रिपोर्टिंग करते हैं। अपराध, राजनीतिक रैलियां, सभाएं और ऐतिहासिक स्थलों जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका, दैनिक सच्चा सागर, A1 टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल और दैनिक रिपोर्ट्स.com जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कार्य किया। संपर्क: manishbagdi.reporter@gmail.com | वेबसाइट: www.thepoliticaltimes.live









