CJP का इंटरवल या खेल खत्म? कानूनी शिकंजे के बीच अब CJP की राह होगी कठिन

CJP का इंटरवल या खेल खत्म? कानूनी शिकंजे के बीच अब CJP की राह होगी कठिन
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सीजेपी की राह कठिन हो गई है दिशाहीन हो गई!!

✍🏻 राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार

सुप्रीम कोर्ट के एक शब्द ‘कॉकरोच’ भले किसी अन्य विषय के संदर्भ में निकला पर अमेरिका के बोस्टन में बैठे अभिजीत दिपके के लिए एक सियासी मुद्दा बन गया। इंस्टाग्राम से फॉलोवर्स का जो खेल शुरू हुआ, वह कोकरोच जनता पार्टी की अनोपचारिक भूमिका बन गई। दिल्ली के जंतर मंतर से पेपर लीक जो चिंगारी फूटी तो सरकार फंस गई। आखिर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ और उससे उत्साहित सीजेपी और उसके नेता कुछ दिनों में देश के नामचीन नेता बन गए, लेकिन अब CJP नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका भले ही जमानत पर छूट गए हैं, उन्हें पता नही, अब वह कानून के शिकंजे में लगातार फंसते जा रहे हैं। जिसकी शुरुआत भी हो चुकी है। कैसे हुई इस रिपोर्ट में समझिए….

ये मुद्दा टूलकिट था या नही ये बात दीगर है लेकिन सभी विपक्षी दलों ने भी इसे संजीवनी बूटी समझकर सेवन कर लिया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र की मोदी सरकार को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया। शिक्षा संस्थानों में बेसिक सुविधाओं को लेकर शुरू किए सीजेपी के आंदोलन को देश व्यापक समर्थन नही मिला और फिर आया वोटर्स लिस्ट का मामला। पहले संसद में हंगामा मचा फिर जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट भी शुरू हुआ। प्रदेशो से युवाओं की भीड़ भी जुटी। आंदोलन जल्द भड़काऊ की श्रेणी तक पहुँचा। अभद्र नारो, अश्लीलता की हदों को पारकर आंदोलन सीजेपी के एजेंडे से बाहर हुआ। केंद्र सरकार ने आक्रामक होने के बजाय रक्षात्मक नीति बनाई और इंडिया गठबंधन, सीजेपी को कानूनी दायरे में धकेलकर उनकी ऐसी मुश्के कसी कि सब ठंडा हो गया। सीजेपी के तीनो बड़े नेता दीपके, सौरव दास, रांका शांति भंग करने, निषिद्ध आज्ञा का उल्लंघन करने जैसे मामलों में धरे गए, भले ही बाद में शांति बहाल करने की शर्त पर रिहा हुए लेकिन वहीं गलती ने दास ओर रांका को तिहाड़ भेज दिया।

केंद्र सरकार के जाल में फंसे दास और रांका के जेल से बाहर आने से पहले ही अभिजीत दीपके का बयान क्या संकेत दे रहा है, ये तो आने वाले दिन तय करेंगे लेकिन दिपके ने ये कहकर अपना बचाव करने का प्रयास किया है कि वे तो रांका और दास को फॉलो कर रहे थे क्योंकि उनमें ही लीडरशिप थी, यानि सीजेपी के संस्थापक दीपके ने सार्वजनिक कबूल कर लिया कि वे आंदोलन के मुख्य कर्ताधर्ता नही है। इस बयान को लोग अलग नजरिए से देख रहे है और समझने की चेष्टा कर रहे है। कानूनी हालातों, मुश्के कसने के बाद अब सीजेपी क्या करेगी इस पर एक तरह से अलग चर्चाएं शुरू हो चुकी है। क्या सीजेपी का ये इंटरवेल है या फिनिश का अंतराल है। हालांकि इंडिया गठबंधन ने फिर से दिल्ली के रामलीला मैदान में फिर वहीं राग छेड़ने का आव्हान किया है, तो प्रश्न है क्या सीजेपी इंडिया गठबंधन के साथ होगी या अलग से रणनीति बनाएगी।

यहां जानिए क्या है कानून का शिकंजा

बताया जा रहा है कि उन्हें दिल्ली क्राइम ब्रांच ने आज दोपहर 12:00 बजे नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। जहां उन्हें जाना होगा। गए तो लंबी पूछताछ होगी और नही गए, तो फिर से कानूनी शिकंजे में फंसने के खतरा मौजूद रहेगा। ऐसा लग रहा है जैसे सीजेपी कानूनी चक्रव्यूह में फंस गई है। अब विचारणीय बात ये है कि क्या सीजेपी के नेता इन हालातों से उबरेंगे या फिर ठंडे हो जाएंगे। सरकार का घेरा उन पर कसता जा रहा है। फंडिंग की जांच भी सम्भावित है न जाने कितनी रस्सियों से जकड़ा जाएगा लेकिन ये सही है कि सीजेपी के सामने अब जीवन मरण का प्रश्न है। सीजेपी की अगली चाल क्या होगी इस पर सबकी निगाहें होगी लेकिन हौसले डगमगाते दिख रहे है। दीपके ने असली बॉस रांका और दास को बताकर अपने को बाहर रखने की कोशिश क्या कहती है इस पर चर्चा हो सकती है ।

मनीष बागड़ी

अब आशुतोष रांका होंगे CJP के असली लीडर ! तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद CJP में क्या होगा? अभिजीत दीपके का बड़ा संकेत

मनीष बागड़ी जनर्लिस्ट द पॉलिटिकल टाइम्स
मनीष बागड़ी, राजनीतिक पत्रकार और द पॉलिटिकल टाइम्स के संपादक हैं। पत्रकारिता में 25 वर्ष से अधिक अनुभव के साथ वे पॉलिटिकल आर्टिकल्स, प्रशासनिक खबरों और विशेष स्टोरीज पर फोकस करते हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखते हैं और IAS, IPS जैसे अधिकारियों से जुड़ी विशेष रिपोर्टिंग करते हैं। अपराध, राजनीतिक रैलियां, सभाएं और ऐतिहासिक स्थलों जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका, दैनिक सच्चा सागर, A1 टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल और दैनिक रिपोर्ट्स.com जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कार्य किया। संपर्क: manishbagdi.reporter@gmail.com | वेबसाइट: www.thepoliticaltimes.live
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मनीष बागड़ी, Author

मनीष बागड़ी, राजनीतिक पत्रकार और द पॉलिटिकल टाइम्स के संपादक हैं। पत्रकारिता में 25 वर्ष से अधिक अनुभव के साथ वे पॉलिटिकल आर्टिकल्स, प्रशासनिक खबरों और विशेष स्टोरीज पर फोकस करते हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखते हैं और IAS, IPS जैसे अधिकारियों से जुड़ी विशेष रिपोर्टिंग करते हैं। अपराध, राजनीतिक रैलियां, सभाएं और ऐतिहासिक स्थलों जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका, दैनिक सच्चा सागर, A1 टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल और दैनिक रिपोर्ट्स.com जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कार्य किया। संपर्क: manishbagdi.reporter@gmail.com | वेबसाइट: www.thepoliticaltimes.live