खरगे के विरोध में उतरी BJP, पत्रकारों पर क्यों निकाली भड़ास? क्या सत्ता का नशा सिर चढ़कर बोल रहा है!
टिप्पणी ✍🏻 मनीष बागड़ी
जयपुर : पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आपत्तिजनक टिप्पणी की। इसको लेकर बीजेपी में गहरा रोष है और होना भी चाहिए, लेकिन राजधानी जयपुर में सोमवार को भाजपा कार्यकर्ताओं का यह विरोध खरगे के खिलाफ न होकर बल्कि पुलिस कर्मियों और पत्रकारों के खिलाफ देखने को मिला। इससे एक तो बात साफ हो गई कि बीजेपी सत्ता के नशे मेें चूर हैं। कार्यकर्ताओं ने जिस तरह से पत्रकारों पर धक्का मुक्की कर हमला किया। उससे यह हरकत किसी गुंडागर्दी से कम नहीं लग रही थी। लोकतंत्र में अपनी बात रखने और प्रदर्शन करना का सबको अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन के नाम पर गुंडागर्दी, यह कहां तक जायज है? यहीं नहीं सत्ता की धौंस, तो उस समय दिखी जब, बीजेपी के बीजेपी के युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष शंकर गोरा पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर तेजी से एक वीडियो भी शेयर हो रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि उन्होंने कानून की गिरेबान तक पकड़ने की हिम्मत कर डाली है। आखिर यह बौखलाहट क्यों? क्या यह सत्ता का नशा नहीं है?

बीजेपी के इस प्रदर्शन को लेकर अब सवाल उठने लगे है। गौर करने वाली बात है कि बीजेपी मुख्यालय से चौमूं हाउस सर्किल तक हुए इस प्रदर्शन मेें पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं का टोटा रहा। जितनी उम्मीद थी, पत्रकारों ने जिस तरह से कवरेज की तैयारी की, उससे तो उन्हें भी निराशा हाथ लगी। हांलाकि बड़े प्रदर्शन की आशंका के चलते पुलिस भी अलर्ट थी, लेकिन उस समय हैरान करने देने वाली तस्वीरे सामने आई।
जब प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यकर्ताओं से अधिक पुलिसकर्मियों की भीड़ अधिक नजर आई। उस समय तो पत्रकार भी उनसे ज्यादा दिखे। इसको लेकर सोशल मीडिया पर तस्वीरे और वीडियो काफी चर्चा में है। एक राष्ट्रीय स्तर के न्यूज़ चैनल के वरिष्ठ पत्रकार ने जिन शब्दों में लाइव कवरेज करते बीजेपी की भीड़ को लेकर वर्णन किया। उसको सुनकर एक बार तो हर किसी को हंसी आ जाए।
आखिर पत्रकारों पर क्यों निकाली भड़ास?
कांग्रेस के खिलाफ इस प्रदर्शन में बीजेपी कार्यकर्ताओं की भीड़ नजर नहीं आई, तो क्या इसका कसूर पत्रकारों का है? जो कवरेज के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपना गुस्सा पत्रकारों पर ही निकाल दिया। उन्होंने पत्रकारों के साथ धक्का मुक्की और हमला किया। यह नजारा किसी गुंडगर्दी से कम नहीं लग रहा था। पत्रकार जो मौके पर इसलिए जाता है, ताकि वह वहां की सच्चाई लोगों तक पहुंचा सके, लेकिन क्या बीजेपी कार्यकर्ताओं को यह सच्चाई इतनी खटकी कि उन्होंने अपना सारा गुस्सा ही पत्रकारों पर ही निकाल दिया। इस घटना में कई पत्रकारों के गंभीर चोटे आई। इसको लेकर सभी पत्रकारों में गहरा आक्रोश भी है। क्या इतना सब होने के बाद भी सीएम भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को अपने कार्यकर्ताओं के अचारण पर संज्ञान नहीं लेना चाहिए? यह निश्चित रूप से विचारणीय विषय है।
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मनीष बागड़ी, राजनीतिक पत्रकार और द पॉलिटिकल टाइम्स के संपादक हैं। पत्रकारिता में 25 वर्ष से अधिक अनुभव के साथ वे पॉलिटिकल आर्टिकल्स, प्रशासनिक खबरों और विशेष स्टोरीज पर फोकस करते हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखते हैं और IAS, IPS जैसे अधिकारियों से जुड़ी विशेष रिपोर्टिंग करते हैं। अपराध, राजनीतिक रैलियां, सभाएं और ऐतिहासिक स्थलों जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका, दैनिक सच्चा सागर, A1 टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल और दैनिक रिपोर्ट्स.com जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कार्य किया। संपर्क: manishbagdi.reporter@gmail.com | वेबसाइट: www.thepoliticaltimes.live






