राजस्थान से जुड़े रावण के खास कनेक्शन, कमलनाथ मंदिर में शिव से पहले रावण की पूजा, मंडोर में मनाया जाता है शोक
उदयपुर/जोेधपुर : देश में मंगलवार को विजयदशमी का पर्व हर्षाेल्लाह के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में बुराई पर सच्चाई की जीत के प्रतीक के तौर पर रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। लंका पति रावण जो भगवान शिव का अनन्य भक्त था। जिसने शिव भक्ति के बल पर तीनों लोकों को अपने अधीन कर लिया। रावण का राजस्थान से भी गहरा कनेक्शन रहा है। जोधपुर रावण का ससुराल माना जाता है, तो रावण पुतले के दहन पर मण्डोर में शोक मनाया जाता है। वहीं राजस्थान के उदयपुर के कमलनाथ मंदिर, जो अपनी विशेषता के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर में श्रद्धालु जाने पर भगवान शिव से पहले रावण की पूजा करते हैं। इसके बाद ही पूजा संपन्न मानी जाती है। इसको लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित है। आईए जानते हैं इन स्थानों के बारे में…
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सबसे पहले रावण की पूजा का यह है रहस्य
लंकापति रावण को प्रकांड पंडित, वेदों-पुराणों का ज्ञाता, संगीतज्ञ कहा जाता था। जिसने शनि देव को भी अपने पैरों के नीचे दबाकर रहने पर मजबूर कर दिया। उदयपुर के कमलनाथ मंदिर, जो रावण की पूजा को लेकर जाना जाता है। इसको लेकर एक प्रचलित पौराणिक कथा है कि रावण ने भगवान शिव की यहां कठोर तपस्या की। उसने प्रतिदिन 108 कमल फूल चढ़ाने का संकल्प लिया। इस बीच एक दिन एक कमल कम पड़ गया। अनन्य शिव भक्त रावण ने बिना किसी देरी के कमल के फूल की जगह अपना सिर काटकर अर्पित कर दिया। उसकी इस भक्ति से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने रावण का सिर जोड़ दिया और रावण को दशानन होने का वरदान दिया। तब से इस स्थान का नाम कमलनाथ महादेव पड़ा। मान्यता है कि भगवान शिव की पूजा से पहले रावण की पूजा की जाती है, तभी पूजा को पूर्ण माना जाता है, अगर रावण की पूजा नहीं हो तो वह पूजा व्यर्थ मानी जाती है।
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श्रीराम से भी इस जगह का बताया जाता है कनेक्शन
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार रावण के अलावा इस स्थान पर भगवान श्रीराम का भी संबंध बताया जाता है। कहा जाता है कि जब भगवान श्री राम 14 सालों के वनवास के लिए गए, तो उन्होंने कुछ समय यहां भी गुजारा। इस स्थान पर शिवलिंग के दूसरी और रावण की भी प्रतिमा है। सावन मास के दिनों में यहां मेले का आयोजन होता है। इसके अलावा श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जमा रहती है। बता दें कि रावण ने अहंकार वश कैलाश पर्वत को उठाया, तब भगवान महादेव ने अपने अंगूठें से दबाव डाला, तो रावण के दोनों हाथ उसके नीचे दब गए। इस दौरान रावण ने भयंकर पीड़ा के बीच भी शिव तांडव स्तोत्र की रचना की।
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प्राकृतिक छटाओं के बीच स्थित है, कमलनाथ महादेव
बारिश के दिनों में कमलनाथ महादेव में रमणीय नजारे देखने को मिलता है। प्रकृति का अद्भुत श्रंृगार लोगों को आकर्षित करता है। उदयपुर के झाड़ोल में स्थित कमलनाथ महादेव, जो उदयपुर शहर से करीब 70 किलोमीटर दूरी पर झाडोल तहसील में आवरगढ की पहाड़ियों पर स्थित है। श्रावण मास में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है। इसके अलावा इस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी लोग अपने पूर्वजों की अस्थियां यहां एक कुंड में विसृजित करते हैं।

जोधपुर में विजयदशमी पर मनाया जाता है शोक
विजयदशमी के मौके पर एक और देश भर में रावण के पुतले का दहन किया जाता है, लेकिन जोधपुर के मंडोर में एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां रावण के दहन पर शोक मनाया जाता है, क्योंकि मंडोर को रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मंदोदरी मयदानव की पुत्री थी। रावण ने मंडोर की पहाड़ी पर मंदोदरी के साथ फेरे लिए थे। जोधपुर में श्रीमाली ब्राह्मण समुदाय, जो खुद को रावण का वंशज मानता है। यहां विजयदशमी के मौके पर अनोखी परंपरा है। जिसके तहत यह लोग शोक मनाते हैं। रावण पुतला दहन के बाद स्नान करते हैं और अपना जनेउ बदलते हैं। इसके बाद मंदिर में तर्पण करके रावण की पूजा की जाती है। जोधपुर के मेहरानगढ़ किले के पास रावण मंदोदरी का मंदिर भी बनाया गया है, जहां रावण की करीब 11 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित है।

मनीष बागड़ी, राजनीतिक पत्रकार और द पॉलिटिकल टाइम्स के संपादक हैं। पत्रकारिता में 25 वर्ष से अधिक अनुभव के साथ वे पॉलिटिकल आर्टिकल्स, प्रशासनिक खबरों और विशेष स्टोरीज पर फोकस करते हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखते हैं और IAS, IPS जैसे अधिकारियों से जुड़ी विशेष रिपोर्टिंग करते हैं। अपराध, राजनीतिक रैलियां, सभाएं और ऐतिहासिक स्थलों जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका, दैनिक सच्चा सागर, A1 टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल और दैनिक रिपोर्ट्स.com जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कार्य किया। संपर्क: manishbagdi.reporter@gmail.com | वेबसाइट: www.thepoliticaltimes.live






