राजस्थान में साइबर ठगी के पीड़ितों को बड़ी राहत, अब फ्रीज रकम वापस पाने के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर, जानिए कैसे
जयपुर : साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए बड़ी राहत की खबर है। साइबर अपराधियों के होल्ड या फ्रिज की गई धनराशि को वापस करने के लिए राजस्थान पुलिस ने रेस्टोरेशन माड्यूल सिस्टम लागू कर दिया है। जिसके तहत अब पीड़ितों को धनराशि की वापसी की प्रक्रिया में बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें अपनी रकम लेने के लिए अनावश्यक रूप से अदालतों और बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साइबर पुलिस के इस नए सिस्टम के तहत अब पीड़ितों के खाते में सीधे वापस धनराशि लौट आएगी। इसके लिए पुलिस ने धन वापसी की तीन श्रेणियां बनाई है।
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क्या है साइबर पुलिस का मनी रेस्टोरेशन माड्यूल
राजस्थान साइबर अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक वीके सिंह ने बताया कि देश में साइबर ठगी की वारदातें लगातार बढ़ रही हैं। इसको देखते हुए भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत 14C द्वारा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिर्पोटिंग पोर्टल शुरू किया गया है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। इस वेबसाइट के माध्यम से पीड़ित साइबर ठगी के शिकार बने हैं, उन्हें साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में होल्ड या फ्रिज की गई धनराशि की वापसी होगी। इसके लिए पीड़ित लोगों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसकी आधिकारिक वेबसाइट mrm-ncrp.mha.gov.in है।
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इन श्रेणियां का धन होगा वापस
इस वेबसाइट के माध्यम से तीन श्रेणियां में पीड़ितों की धन वापसी होगी। इसकी पहली श्रेणी में किसी एक बैंक खाते में फ्रीज राशि ₹50,000 तक हो, तो एफआईआर या न्यायालय के आदेश की आवश्यकता नहीं है। पुलिस रिपोर्ट और इंडेम्निटी बॉण्ड के आधार पर धनवापसी होगी। इसी तरह श्रेणी-2: कुल फ्रीज राशि ₹50,000 से अधिक हो, लेकिन किसी एक बैंक खाते में ₹50,000 से अधिक न हो, तो एफआईआर या न्यायालय के आदेश की जरूरत नहीं है। पुलिस रिपोर्ट के आधार पर धनवापसी होगी। वहीं श्रेणी-3: किसी एक बैंक खाते में फ्रीज राशि ₹50,000 से अधिक हो, तो एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य है। एफआईआर के बाद शेष प्रक्रिया एमआरएम पोर्टल के माध्यम से पूरी होगी।
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इस प्रक्रिया के तहत होगी धन वापसी
साइबर ठगी पीड़ित लोगों को वारदात होने के बाद हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना होगा। जहां उन्हें एक्नॉलेजमेंट नंबर मिलेंगे। इसके बाद संदिग्ध व्यक्ति के खाते की राशि होल्ड कर दी जाती है। बाद में पीड़ित MRM पोर्टल पर अपने धन की वापसी के लिए आवेदन कर सकता है। इसमें पीड़ित को अपनी शिकायत संख्या, ओटीपी सत्यापन और बैंक खाते का विवरण देना होगा। इसके बाद संबंधित जांच अधिकारी शिकायत बैंक ट्रेल होल्ड राशि का सत्यापन करता है। बाद में संदिग्ध खाता धारक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। निश्चित अवधि तक संतुष्टि जनक जवाब नहीं देने पर पुलिस बीएनएसएस की धारा 106 (3) के तहत पीड़ित के धन वापसी की अनुशंसा कर सकती है। ऐसे में पुलिस आदेश या जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बैंक राशि पीड़ित के खाते में ट्रांसफर कर सकती है।

मनीष बागड़ी, राजनीतिक पत्रकार और द पॉलिटिकल टाइम्स के संपादक हैं। पत्रकारिता में 25 वर्ष से अधिक अनुभव के साथ वे पॉलिटिकल आर्टिकल्स, प्रशासनिक खबरों और विशेष स्टोरीज पर फोकस करते हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखते हैं और IAS, IPS जैसे अधिकारियों से जुड़ी विशेष रिपोर्टिंग करते हैं। अपराध, राजनीतिक रैलियां, सभाएं और ऐतिहासिक स्थलों जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका, दैनिक सच्चा सागर, A1 टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल और दैनिक रिपोर्ट्स.com जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कार्य किया। संपर्क: manishbagdi.reporter@gmail.com | वेबसाइट: www.thepoliticaltimes.live






