राजस्थान में लोकतंत्र का मर्डर! टीकाराम जूली का बड़ा हमला

जयपुर : राजस्थान में पंचायत राज और नगरीय निकाय चुनाव को लेकर असमंजस बना हुआ है। इसको लेकर कांग्रेस लगातार भजनलाल सरकार को घेर रही है। इस बीच नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोमवार को बड़ा अटैक करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जो बिना रायशुमारी के बने हैं, उन्हें चुनाव से डर लगता है, इसलिए राजस्थान में लोकतंत्र का सिस्टमैटिक मर्डर किया जा रहा है। पंचायत राज चुनाव न करवाकर ग्रामीण विकास को आईसीयू में धकेला जा रहा है। टीकाराम जूली के इस बयान से सियासी गलियों में हलचल मच गई है।
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जूली ने कहा कि इन चुनावों में देरी के कारण केंद्र सरकार से मिलने वाले लगभग 1800-1900 करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण फंड के अटकने का सीधा खतरा पैदा हो गया है, जिससे ग्रामीण अंचल की विकास परियोजनाएं पूरी तरह ठप होने की कगार पर हैं। केवल ग्रामीण ही नहीं, बल्कि शहरी निकायों में भी चुनाव टालकर यह सरकार जनमत का दमन कर रही है। निर्वाचित प्रतिनिधियों और पार्षदों की अनुपस्थिति में जनता के छोटे-बड़े काम फाइलों में दबे पड़े हैं और आमजन को अपने बुनियादी अधिकारों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। स्पष्ट है कि सरकार जनप्रतिनिधियों की जगह अफसरशाही के माध्यम से स्थानीय निकायों में तानाशाही चलाना चाहती है।
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भाजपा नेताओं के पुत्रों को सेट किया जा रहा है
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि भाजपा सरकार न केवल प्रशासनिक बल्कि शैक्षणिक और खेल संस्थाओं के लोकतंत्रीकरण से भी भयभीत है। राजस्थान विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के तमाम परिसरों में छात्रसंघ चुनाव न कराकर युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। छात्रों ने अपनी जायज मांगों के लिए अनोखे प्रदर्शन किए, लेकिन इस संवेदनहीन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। यही हाल खेल जगत का भी है, जहां आरसीए में चुनाव कराने के बजाय एडहॉक कमेटी में ताश के पत्तों को फेंटे जाने वाले अंदाज़ में मनमाने बदलाव किए जा रहे हैं और भाजपा नेताओं के पुत्रों को सेट किया जा रहा है।
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सरकार को चुनावी प्रक्रिया से परहेज
टीकाराम जूली का कहना है कि इस सरकार का चुनावों के प्रति यह अलगाव और डर अनायास नहीं है, बल्कि इसके मूल में इस सत्ता का गठन ही दोषपूर्ण है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा स्वयं लोकतांत्रिक तरीके से विधायक दल के नेता नहीं चुने गए थे, बल्कि उनके नाम की ‘पर्ची’ भाजपा दफ्तर में सार्वजनिक रूप से खोलकर उन्हें थोपा गया था। जो सरकार खुद एक पर्ची के जरिए अस्तित्व में आई हो, वह भला अन्य संस्थाओं में निष्पक्ष चुनाव कैसे होने दे सकती है? यह ‘पर्ची सरकार’ हर जगह चुनाव से दूरी बनाकर केवल अपना ‘पर्ची राज’ कायम करना चाहती है। राजस्थान की जनता देख रही है कि कैसे एक-एक कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है और लोकतंत्र के पहिए को तानाशाही के स्पीडब्रेकर से रोका जा रहा है।
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पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखना पसंद है, पत्रकारिता में 20 वर्ष से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में ‘स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स’ लिखता हूं, पत्रकारिता के इस सफर में राजस्थान पत्रिका, A1टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल, दैनिक रिपोर्टर्स.com जैसे न्यूज़ प्लेटफार्म पर भी कार्य किया है।
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