मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बैठ गया ‘रीलबाज चपरासी’! रील वायरल हुई तो मच गया बवाल, हैरान कर देगा Video
बीकानेर : सोशल मीडिया पर लाइक और व्यूज पाने के लिए आजकल युवाओं में गजब का पागलपन देखने को मिल रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान हैं। यहां तक कि लोग रील बनाने के लिए न्यायपालिका की गरिमा को भी भंग करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला राजस्थान के बीकानेर से सामने आया है, जहां एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बैठकर रील बनाई और इस सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बाद में जब यह रील पुलिस के सामने आई तो हडकम्प मच गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है।
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मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बैठकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने बनाई रील
हैरान कर देने वाला यह मामला बीकानेर के न्यायालय से सामने आया है, जहां कोर्ट में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पुष्पेंद्र भाटी ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर यह शर्मनाक करतूत कर डाली। इस दौरान कोर्ट में किसी के नहीं होने का लाभ उठाकर पुष्पेंद्र भाटी ने अपने दो दोस्त मनीष डूडी और भूपेंद्र के साथ यह पूरा ड्रामा रचा। इस दौरान वायरल रील में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पुष्पेंद्र भाटी मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बैठा हुआ नजर आता है। इस रील को बनाकर बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। बाद मेें यह रील जब तेजी से वायरल हुई तो पुलिस और प्रशासन में हडकंप मच गया।
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पुलिस ने दबोच लिया रीलबाज चपरासी को
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बैठकर बनाई रील अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इसको लेकर लोग उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं। इधर, यह वीडियो यह पुलिस प्रशासन के सामने आया, तो हड़कंप मच गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी पुष्पेंद्र भाटी मनीष डूडी और भूपेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ करने में जुटी हुई है। इधर, सोशल मीडिया पर इस रील को लेकर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है।
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न्यायालय की मर्यादा भंग करना कानूनी अपराध
न्यायालय की मर्यादा को भंग करना एक कानूनी अपराध है। इस दौरान एक कर्मचारी द्वारा मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बैठने के मामले में उस कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। मामले में दोषी कर्मचारियों पर निलंबन, नौकरी से बर्खास्तगी, वेतन कटौती और वेतन वृद्धि पर रोक की जा सकती है। इसके अलावा न्यायालय की मर्यादा भंग करने का मामला भी दर्ज किया जा सकता है। यही नहीं न्यायालय की अवहेलना एक्ट 1971 के तहत कार्रवाई करते हुए जेल भी हो सकती है।
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