जहाजपुर का नाम “यज्ञपुर” क्यों हुआ, आपने कभी सोचा? यहां जानिए नाम परिवर्तन की असली वजह
✍️ मनीष बागड़ी
जयपुर/भीलवाड़ा : सीएम भजनलाल ने शुक्रवार को विधानसभा में सरकार के बड़े फैसले का ऐलान किया। इसके तहत प्रदेश के तीन स्थानों का नाम परिवर्तन किया गया। इनमें माउंट आबू को आबूराज, जहाजपुर को यज्ञपुर और कांमा को कामवन किया है। इससे पहले सरकार ने फिर खैरथल-तिजारा का नाम भर्तृहरि नगर किया था। इधर, माउंट आबू के नाम परिवर्तन को लेकर काफी समय से मांग भी की जा रही थी। वहीं, भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर को यज्ञपुर किए जाने को लेकर सियासत में काफी चर्चा हो रही है। हांलाकि बीते दिनों वहां के विधायक गोपीचंद मीणा ने इस नाम को लेकर विधानसभा में भी मांग उठाई थी। इस रिपोर्ट से जानिए आखिर क्यों जहाजपुर को नाम यज्ञपुर किया गया, क्या इसके पीछे कोई पीछे पौराणिक इतिहास की वजह तो नहीं है?
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यज्ञपुर किए जाने के पीछे यह है पौराणिक रहस्य
सीएम भजनलाल ने भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर कस्बे का नाम यज्ञपुर किया है। इसको लेकर क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। विधायक गोपीचंद मीणा की पहल के बाद यह नाम परिवर्तन किया गया, लेकिन इसके पीछे पौराणिक रहस्य छुपा हुआ है, यह काफी रौचक है। पौराणिक कथाओं में बताया जाता है कि कलयुग ने द्वापर युग के अंत में धरती पर आने के लिए राजा परीक्षित के स्वर्ण मुकुट पर शरण ली। इसके बाद कलियुग ने राजा परीक्षित से एक ऋषि जो तपस्या में लीन थे, उनका अपमान करवा दिया। राजा ने उनके गले में एक मरा सर्प पर डाल दिया था। इसके कारण ऋषि पुत्र ने क्रोध में उन्हें सात दिन बाद तक्षक नाग के काटने का श्राप दे दिया। उसके बाद सातवें दिन तक्षक नाग के काटने से राजा परीक्षित की मृत्यु हुई।
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जहाजपुर में हुआ था नागों का यज्ञ, इसलिए हुआ यज्ञपुर
राजा परीक्षित की मौत के बाद उनके पुत्र जन्मजय इस घटना से काफी आक्रोशित हुए। उन्होंने सर्प जाति से बदला लेने के लिए ऋषियों के साथ एक यज्ञ करवाया। पुरानी कथाओं में दावा है कि इस यज्ञ में मंत्रों के प्रभाव से समस्त सर्प हवन कुण्ड में गिर कर नष्ट होने लगे। इसके बाद देवताओं ने इस विध्वंस को देखते हुए जन्मजय को इसे रोकने के लिए समझाया। इस दौरान यज्ञ में सर्पोें के खून से एक नदी बन गई, जिसे ‘नागदी’ कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यही जहाजपुर वहीं स्थान है, जहां यह सांपों का यज्ञ हुआ था। जिसे सरकार ने अब जहाजपुर का नाम अब यज्ञपुर रखा है।
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विधायक गोपीचंद मीणा के प्रयास से हुआ नाम परिवर्तन
जहाजपुर का नाम यज्ञपुर किए जाने के पीछे का श्रेय विधायक गोपीचंद मीणा को जाता है। उन्होंने बीते दिनों सीएम भजनलाल शर्मा से विधानसभा में जहाजपुर के नाम परिवर्तन की मांग उठाई थी। गोपीचंद मीणा लगातार दो बार जहाजपुर के बीजेपी विधायक हैं। जहाजपुरा नगर पालिका की कुल जनसंख्या करीब 32000 के आसपास है। यह कस्बा कई पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व को समेटे हुए हैं। जहाजपुर में जैन समाज का प्रसिद्ध स्वस्ति धाम स्थित है, जो जैन समाज के आस्था का बड़ा केंद्र है। इसके अलावा भी पुराने किले जहाजपुर में स्थित है।
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यहां जानिए जहाजपुर के इतिहास के बारे में
जहाजपुर की स्थापना को लेकर बताया जाता है कि मौर्यकालीन सम्राट संप्रीती ने जहाजपुर का निर्माण करवाया था। इसके बाद 14 शताब्दी में इसको राणा कुंभा ने पुन निर्माण करवाया। इतिहासकार बताते हैं कि अकबर ने जहाजपुर के किले पर 16वीं शताब्दी में अधिकार कर लिया था। यहां के दर्शनीय स्थान की बात करें, तो जहाजपुर के किले में सर्वेश्वर नाथ जी का मंदिर है। इसके अलावा बारा देवरा एक प्रसिद्ध स्थान है, जहां भगवान शिव के मंदिरों का एक समूह है। इसी तरह एक जैन मंदिर है, जहां मुनि सुव्रत नाथ की प्रतिमा भी स्थित है।
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