टोंक (रवि सैनी) : राजस्थान के टोंक जिलेभर में ईंट भट्टे का संचालन खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। लहन, उनियारा, दूनी और राजमहल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ईंट भट्टे बिना आवश्यक अनुमति और नियमों के संचालित हो रहे हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह पर यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है?
जिला प्रदूषण के मामले में लगातार राजस्थान में तीसरे स्थान पर बना हुआ है। हाल ही में टोंक जिले में 289 AQI प्रदूषण स्तर दर्ज किया गया, इसके बावजूद ईंट भट्टा संचालक पर्यावरण नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। कई ईंट भट्टे ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी तक नहीं ले रखी है। इतना ही नहीं, ईंट भट्टों के लिए मिट्टी का खनन भी नियमों के विरुद्ध किया जा रहा है। जिलेभर में गिने-चुने ईंट भट्टे के पास ही मिट्टी खनन की वैध अनुमति है, जबकि अधिकांश संचालक कृषि भूमि, चारागाह भूमि और यहां तक कि सरकारी भूमि से अवैध खनन कर रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि कई ईंट भट्टे पर छोटे-छोटे बच्चों से श्रम कराया जा रहा है, जो बाल श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। हालांकि अब टोंक प्रशासन ने जिले में संचालित सभी ईंट भट्टे की जांच कर जल्द सख्त कार्रवाई करने का मन बना लिया है। देखना यह होगा कि यह कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में अवैध ईंट भट्टे पर शिकंजा कसा जाता है।
पॉलिटिकल आर्टिकल्स लिखना पसंद है, पत्रकारिता में 20 वर्ष से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) में 'स्टेट पॉलिटिकल आर्टिकल्स' लिखता हूं, पत्रकारिता के इस सफर में राजस्थान पत्रिका, A1टीवी, न्यूज़ इंडिया, Network 10, हर खबर न्यूज़ चैनल, दैनिक रिपोर्टर्स.com जैसे न्यूज़ प्लेटफार्म पर भी कार्य किया है।
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