कुंभा महल से रातों के सन्नाटे में आ रही रहस्यमयी आवाजेे! जानिए चित्तौड़गढ़ किले के रोंगटे खड़े करने वाले इस रहस्य को
Kumbha Mahal News चित्तौड़गढ़ : राजस्थान का मेवाड़ वंश अपनी वीरता के लिए जाना जाता है। चित्तौड़गढ़ किला (Chittorgrah Fort) राजपूत वंश की वीरता और शूरता का ऐसा प्रतीक है, जो लोगों में स्वाभिमान के लिए जोश भर देता है। महाराणा प्रताप (Maharana Pratap), महाराणा कुंभा (Maharana Kumbha) जैसे वीर शासकों का गौरवशाली इतिहास चित्तौड़गढ़ से जुड़ा हुआ है। चित्तौड़गढ़ किले की गौरवशाली धरोहर आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। आज भी इस किले के कई ऐसे अनसुलझे रहस्य है, जो लोगों में रोमांच पैदा करते हैं। चित्तौड़गढ़ किला एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां आज भी कुंभा महल से घुंघरू और ढोलक की थाप की अजीबोगरीब आवाजें एक अनूठा रहस्य बन गई है। लोगों में इस चर्चा से रोंगटे खड़े हो गए हैं। आखिर कुंभा महल में यह आवाजे क्यों आ रही है? इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। कुंभा महल से आने वाली आखिर इन अजीबोगरीब आवाजों के पीछे क्या रहस्य गहराया हुआ है? इसको लेकर नई बहस शुरू हो गई हैं।
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घुंघरू की झंकार और ढोलक की थाप के पीछे क्या है रहस्य?
राजस्थानी की गौरवशाली वीर गाथा का प्रतीक चित्तौड़गढ़ किला देश ही नहीं बल्कि विश्व के पटल पर भी अपनी अनूठी पहचान रखता हैं। इस बीच चित्तौड़गढ़ किला एक अजीबोगरीब रहस्य के कारण चर्चा में है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह रहस्य कुंभा महल से सुनाई देने वाली रहस्यमयी आवाजों का है, जहां रात के सन्नाटे में भी घुंघरू की झंकार, गीतों के बीच और ढोलक की थाप सुनाई देती है। इन रहस्यमयी आवाजों की चर्चा के कारण अब लोगों के रोंगटे खड़े होने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के दावे के अनुसार दुर्ग में रहने वाली बुजुर्ग महिला मोहिनी देवी और एक अन्य बुजुर्ग मदनलाल माली ने भी इस चीज का दावा किया है। इसके बाद अब कुंभा महल का रहस्य और गहरा गया है।
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सन्नाटे के बीच आती है आवाजे, लेकिन कोई नहीं दिखाई देता
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोहिनी देवी और मदनलाल माली ने कुंभा महल के रहस्य को लेकर दावा किया है। उनका कहना है कि आज भी कुंभा महल से रात के सन्नाटे में रहस्यमयी आवाजें सुनाई देती है, लेकिन जब वहां जाकर देखा जाता है, तो कोई भी नजर नहीं आता है। उन्होंने बताया कि महल के भीतर से घुंघरू की झंकार और ढोलक की थाप सुनाई देती है। यहीं नहीं पुराने गीतों की गूंज सुनाई देती है। मानो लगता है, जैसे महल में कोई उत्सव मनाया जा रहा हो, लेकिन उन्होंने जब भी इन आवाजों का पीछा कर देखा, तो वह कोई भी नहीं दिखाई देता। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह कोई भ्रम है या फिर कुंभा महल में आज भी ऐसा कोई है, जो लोगों को अपनी उपस्थिति का अहसास कराता हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के बाद अब यह रहस्य और भी गहरा गया है।
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यह है, चित्तौड़गढ़ के कुंभा महल का इतिहास
चित्तौड़गढ़ का कुंभा महल एक ऐतिहासिक धरोहर है, जो मेवाड़ वंश की वीरता का प्रतीक है। कुंभा महल का निर्माण महाराणा कुंभा ने करवाया था, जो सबसे पुराना महल है। यह महल जर्जर हो गया था, जिसे महाराणा कुंभा ने जीणोद्धार करवाया। कुंभा महल का इतिहास राजपूत रानियां के जौहर से भी जुड़ा हुआ है। 1303 में मुगल शासक अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर हमला किया था। इस दौरान रानी पद्मिनी सहित हजारों महिलाओं ने मुगलों से बचने के लिए जोहर किया। इसको लेकर आज भी कहा जाता है कि जौहर स्थल पर अजीबो गरीब चीखें सुनाई देती है। इसको लेकर लोगों के अलग-अलग दावे हैं।
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