अंता से क्या प्रभूलाल सैनी होंगे बीजेपी उम्मीदवार! जानिए बदलती समीकरणों का लेटेस्ट अपडेट
जयपुर : राजस्थान में अंता विधानसभा (Anta Vidhansabha) चुनाव को लेकर बीजेपी की सियासत में जमकर हलचल है। इधर, बीजेपी से कैंडिडेट को लेकर लगातार सियासी समीकरणों में बदलाव होता दिखाई दे रहा है। इस बीच अंता विधानसभा से पूर्व मंत्री प्रभु लाल सैनी (Prabhulal Saini) का नाम एक बार फिर जोरों पर हैं। सियासी गलियारों में उनका नाम उम्मीदवारों की लिस्ट पर टॉप पर बताया जा रहा है। हालांकि पूर्व जिला प्रमुख नंदलाल सुमन भी इस दौड़ में है। इस बीच पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundra Raje) से मुलाकात करने उनके आवास भी पहुंचे। ऐसे में चर्चा है कि पार्टी के निर्देश पर पूर्व मंत्री सैनी वसुंधरा राजे से मुलाकात करने पहुंचे हैं। बता दें कि पूर्व मंत्री सैनी वसुंधरा सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री रहे, लेकिन बाद में उनके बीच दूरियां आ गई थी। माना जा रहा है कि बीजेपी अब किसी भी समय अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है।
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क्या प्रभु लाल सैनी होंगे अंता से घोषित?
पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी वसुंधरा सरकार में 2003 से 2008 और 2013 से 2018 तक दो बार कैबिनेट मंत्री रहे। सियासी समीकरणों में बदलाव के बाद वसुंधरा राजे और प्रभु लाल सैनी के बीच दूरियां आई। इस कारण सियासी गलियारों में यह चर्चा रही कि वसुंधरा राजे प्रभुलाल सैनी के नाम को लेकर राजी नहीं है। लेकिन तेजी से बदलते हुए सियासी घटनाक्रम में एक बार फिर प्रभु लाल सैनी का नाम उम्मीदवारों की लिस्ट में ऊपर बताया जा रहा है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के निर्देश पर प्रभु लाल सैनी वसुंधरा राजे से मिलकर उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए उनके आवास पर गए हैं, जहां उनकी मुलाकात हुई।
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वसुंधरा राजे की सहमति के कारण रुकी हुई है घोषणा
बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और झालावाड़ बांरा के सांसद दुष्यंत सिंह यह प्रभाव वाला क्षेत्र है। उनकी सहमति के बिना उम्मीदवार घोषित करने में इस देरी को माना जा रहा है। इस बीच पूर्व मंत्री सैनी के उनके आवास पर पहुंचने को लेकर सियासी चर्चा यही है कि इसे वसुंधरा राजे के मन से नाराजगी को दूर करने से जोड़ कर देखा जा रहा हैं। हालांकि वसुंधरा राजे के करीबी पूर्व जिला प्रमुख नंदलाल सुमन और मोरपाल के नाम भी सियासी चर्चा में है। इधर, अंता विधानसभा के कुल 2 लाख 37 हजार मतदाताओं में माली समाज के करीब 45 हजार मतदाता हैं। ऐसी स्थिति में बीजेपी माली उम्मीदवार पर विश्वास जता सकती है।
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